Bachapan Ki Smritiyan

बचपन की स्मृतियाँ 


जब मैं छोटा बच्चा था,
बिंदास खेल-कूद करता था;
बेफिक्र हर-दम रहता था,
जब मैं, छोटा बच्चा था।

खाना-पीना मस्त रहना,
अपने काम में व्यस्त रहना;
न स्कूल जाने की चिंता,
ना कमाने की, जिम्मेदारी।

दोस्तों के संग बिते पल,
खटे-मिठे, रंग-बिरंगे कल;
हंसी-खुशी के सुनहरे पल में,
जैसे हो अपनी बादशाहत।

गिरता-उठता बाज न आता,
माँ-पिताजी से डाॅट भी खाता;
कभी मार, तो कभी दुलार,
बचपन की क्या बात थी यार!

काश! मैं फिर छोटा हो जाता,
भोला-भाला बच्चा बन जाता।

-खरांशु छवि



बचपन की स्मृतियाँ  Poem By Kharanshu Chhavi
बचपन की स्मृतियाँ 

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