आहट हुई, कुछ इस कदर...

आहट हुई, कुछ इस कदर...


पास होकर भी जो दूर हो,
वक्त के आगे जो मजबुर हो;
इंतज़ार है, पर पता नहीं,
सफल हूं, पर असफल भी।

खून बहे, बहे पसीना,
मंजिल की तलाश में;
आ रहा है, पर चैन नहीं,
जा रहा है, पर दु:ख नहीं।

मुस्कुरा रहा, पर हंस नहीं,
चुप है, पर खामोश नहीं;
गा रहा है, या रो रहा ?
कह सकता है, पर बोल नहीं।

हताश है दिल, पर थक्का नहीं,
दो - दो हाथ मुश्किलों के साथ;
छाप छोड़ जाएंगे कुछ इस कदर
दिल में अरमां कुछ ऐसे हैं!

सुन रहा, पर सच या झूठ ?
देख रहा, पर स्वप्न या हकीकत ?
आंखें नम है, पर गम से नहीं!
ईश्वर ने दिया, किसी से कम नहीं।

आना अभी बाकी कुछ खास है,
क्योंकि, खुद पे जो विश्वास है।

                                                            - खरांशु छवि



Aahat Hui, Kuchh Iss Kadar Poem By Kharanshu Chhavi
♡ आहट हुई, कुछ इस कदर...♡


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