Kharanshu Chhavi Poems

बचपन की स्मृतियाँ 

जब मैं छोटा बच्चा था,
बिंदास खेल-कूद करता था;
बेफिक्र हर-दम रहता था,
जब मैं, छोटा बच्चा था।

खाना-पीना मस्त रहना,
अपने काम में व्यस्त रहना;
न स्कूल जाने की चिंता,
ना कमाने की, जिम्मेदारी।

दोस्तों के संग बिते पल,
खटे-मिठे, रंग-बिरंगे कल;
हंसी-खुशी के सुनहरे पल में,
जैसे हो अपनी बादशाहत।

गिरता-उठता बाज न आता,
माँ-पिताजी से डाॅट भी खाता;
कभी मार, तो कभी दुलार,
बचपन की क्या बात थी यार!

काश! मैं फिर छोटा हो जाता,
भोला-भाला बच्चा बन जाता।

बचपन की स्मृतियाँ Poem By Kharanshu Chhavi
बचपन की स्मृतियाँ


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 सर्दियों में स्कूल


खिड़की से जब सर्द हवाएँ;
सर-सर कर के आती है,
ठंढ़क भरा सुकून देकर;
दिल में उतर जाती है।

प्रकृति का ये ठंढ़क रूप;
बड़ा मनोरम लगता है,
सफेद चादर से जब;
नया सवेरा निकलता है।

घर से जब स्कूल के लिए;
तैयार होकर निकलते हैं,
ठंडी पवन भरा सर्द राहें;
बड़ा मनोरम लगता है।

खिलता है रवि, जब आसमां में
सबके मन को भाता है,
बच्चे, बुढ़े और जवान, सब
मस्त-मगन हो जाते हैं।

सर्दियों में स्कूल By Kharanshu Chhavi
😀 सर्दियों में स्कूल😀



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समय की चेतना


ज़ीवन है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इस पर अभिमान
कर गुजरो कुछ ऐसा जिससे,
अमर हो जाये तेरा नाम

समय है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इसका अपमान
चला सदैव जो साथ इसके,
   जा पहूँचा शिखर पे अपने

समय होता है सबसे बलवान
करो न कभी इसका अपमान
जब ये अपना जोर दिखाता,
सभी को घुटनों पर ले आता

जीवन का आधार जो ये है
दो-धारी तलवार भी ये है
दिन-प्रतिदिन सभी प्रार्थना करते,
बुरा न दिन कभी आये जीवन में

समय की चेतना Kharanshu Chhavi First Poem


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मेरी कलम

मेरा हाथ क्या लिखना चाहता है।
अभी से क्या बताऊ मैं ,
मेरी उँगलियाँ है बस में नहीं 
इतनी धार है इस तलवार में
कि कल्पना करना मुश्किल है 
जो चल गया एक बार जो ये 
कुछ भी कह पाना मुश्किल है
शब्द गवा बैठते हैं सभी, इसकी तारीफ में 
इतनी ताकत है इसमें -
दुनिया में नम्बर -1 बना सकता है।

Kharanshu Chhavi pen try to say something.


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