Kharanshu Chhavi First Poem "समय की चेतना"

समय की चेतना


ज़ीवन है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इस पर अभिमान
कर गुजरो कुछ ऐसा जिससे,
अमर हो जाये तेरा नाम

समय है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इसका अपमान
चला सदैव जो साथ इसके,
जा पहूँचा शिखर पे अपने

समय होता है सबसे बलवान
करो न कभी इसका अपमान
जब ये अपना जोर दिखाता,
सभी को घुटनों पर ले आता

जीवन का आधार जो ये है
दो-धारी तलवार भी ये है
दिन-प्रतिदिन सभी प्रार्थना करते,
बुरा न दिन कभी आये जीवन में


रचनाकार
खरांशु छवि
(मेरी पहली व प्रारंभिक रचना 07 दिसंबर 2018)

"समय की चेतना" Poem By Kharanshu Chhavi
Kharanshu Chhavi First Poem
"समय की चेतना"

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