शिक्षक दिवस (5 सितंबर ) पर प्रभावशाली भाषण
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सर्वपल्ली राधाकृष्ण(5 September 1888 – 17 April 1975) |
माननीय प्राचार्य महोदय, शिक्षकगण, शिक्षकेत्तर कर्मचारीगण एवं मेरे प्यारे दोस्तों, आज बहुत ख़ुशी का दिन है कि आज हमारे बिच फिर से शिक्षक दिवस एक नया रूप को लेकर आया है। कहा जाता है कि बिना गुरु का ज्ञान नहीं होता है और न ही हम अपने जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। अतः हमें हमेशा अपने मौलिक रूपों को पहचानते हुए गुरु का सम्मान करते हुए अध्ययन करना चाहिए, क्योकि गुरु वह विशेष व्यक्ति है जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलते हैं और उन्हीं के मार्गदर्शन में हम अपना लक्ष्य को प्राप्त कर पाते हैं।
आज बड़े हर्ष की बात है कि हमारे प्रथम उपराष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्ण का जयंती है। कहा जाता है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन संघर्ष तौर पर विताते हुए एक निजी शिक्षक के तौर पर उभरे और उसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया ताकि देश का उत्थान हो सके, साथ ही आम लोग मिलकर देश की एकता-अखंडता बरक़रार रखते हुए कार्य का संचालन करें। इन्हीं तथ्यों के आधार पर उन्होंने अपना हर कार्य समर्पण के तौर पर किया ताकि किसी भी प्रकर के विकास में कोई भी समस्या न आए और अंतिम तथ्यों के आधार पर लक्ष्य की प्राप्ति किया।
कहा जाता है कि बिना लक्ष्य का कोई भी जीवन नहीं होता है। इसलिए मेरे प्यारे दोस्तों हमें चाहिए कि लक्ष्य को बनाकर अध्ययन करें ताकि हमारा जीवन सफल हो और किसी भी समस्याओं का डटकर मुकाबला कर सकें। कहा जाता है गुरु के बिना ज्ञान नहीं और कोई भी ज्ञान तभी स्थाई रहेगा जब हम गुरु को आत्मसात करेंगे ताकि विकाश में कोई बाधा न पहुंचे इन्हीं कारणों से कहा गया कि-
भावार्थ:- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है, गुरु ही महेश(शंकर) है; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है; अतः उन सद्गुरु को नमन करता हूँ।
मेरे प्यारे दोस्तों वर्तमान समय में शिक्षा का स्तर बिलकुल बदल गया है। आज की शिक्षा प्रणाली में विभिन प्रकार के तकनिकी उपकरणों का समावेश है। जिसके कारण शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन हुआ। इसलिए हमें चाहिए कि बदलते हुए परिवेश में, समाज में शिक्षा के स्तर को समझकर अध्ययन करते जाएं तथा विकास के मार्ग को प्रशस्त करें।
विशेष क्या कहूं अपने गुरु को नमन तथा प्यारे मित्रों को नमस्कार।
-खरांशु छवि

4 Comments
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