सर्दियों में स्कूल
खिड़की से जब सर्द हवाएँ;
सर-सर कर के आती है,
ठंढ़क भरा सुकून देकर;
दिल में उतर जाती है।
सर-सर कर के आती है,
ठंढ़क भरा सुकून देकर;
दिल में उतर जाती है।
प्रकृति का ये ठंढ़क रूप;
बड़ा मनोरम लगता है,
सफेद चादर से जब;
नया सवेरा निकलता है।
घर से जब स्कूल के लिए;
तैयार होकर निकलते हैं,
ठंडी पवन भरा सर्द राहें;
बड़ा मनोरम लगता है।
खिलता है रवि, जब आसमां में
सबके मन को भाता है,
बच्चे, बुढ़े और जवान, सब
मस्त-मगन हो जाते हैं।
- खरांशु छवि
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| 😀 सर्दियों में स्कूल😀 |

3 Comments
Bahot khub bhai
ReplyDeleteShandar yaar
ReplyDeleteWah maza aa gaya
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