समय की चेतना
ज़ीवन है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इस पर अभिमान
कर गुजरो कुछ ऐसा जिससे,
अमर हो जाये तेरा नाम
समय है यह बहुत मूल्यवान
करो न कभी इसका अपमान
चला सदैव जो साथ इसके,
जा पहूँचा शिखर पे अपने
समय होता है सबसे बलवान
करो न कभी इसका अपमान
जब ये अपना जोर दिखाता,
सभी को घुटनों पर ले आता
जीवन का आधार जो ये है
दो-धारी तलवार भी ये है
दिन-प्रतिदिन सभी प्रार्थना करते,
बुरा न दिन कभी आये जीवन में
रचनाकार
खरांशु छवि
(मेरी पहली व प्रारंभिक रचना 07 दिसंबर 2018)
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| Kharanshu Chhavi First Poem "समय की चेतना" |

10 Comments
बड़ी सुन्दर कविता है
ReplyDeleteThanks
DeleteThanks
ReplyDeleteExcellent brother keep it up
ReplyDeleteOf course
DeleteGood
ReplyDeleteअति सुन्दर कविता है
ReplyDeleteNice bro 👌 continue
ReplyDeleteThis deserves more attention.
ReplyDeleteYou have the real talent.
Keep going bro!
Awesome Poem Bhai
ReplyDeleteIf my contents touch your heart then please left a good comment which motivate me to bring lots of these type of genuine contents.
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